रांची अनगड़ा टाटीसिलवे रांची मुरी जंक्शन के लोगों को अध्यात्मिक ज्ञान भक्ति साधना एवं विज्ञान गणित से संबंध की जानकारी दी गई।
मुख्य वक्ता के रूप में विद्वान सन्त तपस्वी श्री पंडित मारुति नंदन , मिश्रा पंडित जी आए हुए थे।
उन्होंने बताया कि हम सभी को तकनीक के जरिए अपनी विद्वत्ता और गणित के सवाल पर जोर देते रहने के बजाय इसे ध्यान विधि से करें तो बहुत आसान हो जाएगा।
छात्र जीवन में संयम से चारित्रिक निर्माण के साथ अध्यात्म ज्ञान भी जरूरी है।
उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है मानव कल्याण के लिए। भक्ति साधना के पथ पर आगे बढ़ने के साथ गणित के महत्व को समझते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
विज्ञान गणित के महत्व को समझते हुए मानवता के प्रति जागरूक हो गया समाज।
भारत के सन्त तपस्वी गणित एवं विज्ञान के जानकार थे, उन्होंने अपना जीवन यापन करने के लिए जंगल की जड़ी बूटियों का सहारा लिया और गणित के सवाल को बनाया।
पंडित मारुति नंदन मिश्रा पंडित जी ने साफ कर दिया कि पंडित एवं सन्त को अध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान गणित के सवाल को हल करना चाहिए एवं बच्चों को शिक्षा देना चाहिए। संत तपस्वी ऋषि-मुनी योगी के रूप में समय नहीं बर्बाद करना चाहिए, समय का सदुपयोग करें शिक्षा प्रदान कर के। संत तपस्वी का मतलब हीं है कि भक्ति के साथ शिक्षा का प्रसार करना।
हम सभी सदस्य उनको नमन करते हैं जिन्होंने इतनी अच्छी जानकारी हम लोगों को दी। हम मिश्रा पंडित जी को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने अपना बहुमूल्य समय हमें दिया।
मुख्य वक्ता के रूप में विद्वान सन्त तपस्वी श्री पंडित मारुति नंदन , मिश्रा पंडित जी आए हुए थे।
उन्होंने बताया कि हम सभी को तकनीक के जरिए अपनी विद्वत्ता और गणित के सवाल पर जोर देते रहने के बजाय इसे ध्यान विधि से करें तो बहुत आसान हो जाएगा।
छात्र जीवन में संयम से चारित्रिक निर्माण के साथ अध्यात्म ज्ञान भी जरूरी है।
उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है मानव कल्याण के लिए। भक्ति साधना के पथ पर आगे बढ़ने के साथ गणित के महत्व को समझते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
विज्ञान गणित के महत्व को समझते हुए मानवता के प्रति जागरूक हो गया समाज।
भारत के सन्त तपस्वी गणित एवं विज्ञान के जानकार थे, उन्होंने अपना जीवन यापन करने के लिए जंगल की जड़ी बूटियों का सहारा लिया और गणित के सवाल को बनाया।
पंडित मारुति नंदन मिश्रा पंडित जी ने साफ कर दिया कि पंडित एवं सन्त को अध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान गणित के सवाल को हल करना चाहिए एवं बच्चों को शिक्षा देना चाहिए। संत तपस्वी ऋषि-मुनी योगी के रूप में समय नहीं बर्बाद करना चाहिए, समय का सदुपयोग करें शिक्षा प्रदान कर के। संत तपस्वी का मतलब हीं है कि भक्ति के साथ शिक्षा का प्रसार करना।
हम सभी सदस्य उनको नमन करते हैं जिन्होंने इतनी अच्छी जानकारी हम लोगों को दी। हम मिश्रा पंडित जी को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने अपना बहुमूल्य समय हमें दिया।
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